भोलेनाथ
नादान है इंसान ये समझ नहीं पाता है करता वो है मगर सब तु ही…
नादान है इंसान ये समझ नहीं पाता है करता वो है मगर सब तु ही…
वो मर्द हैं… दिल की बातों को वो जुंबा से कह नहीं पाएंगे, आखों में…
निगाहों में जो लाए हो, मेरे दिल में यहां रख दोl नफरत हो मोहब्बत हो…
तू मेरी बंद डायरी में दफ़्न फटे पन्नों सा है, जिसमें जख्म मेरा पर निशा…
Being happy, Being positive का formula भी, कुछ corona vaccine जैसा है, हर एक दावा…
कोई सोना बताता है कोई चांदी बताता है, कोई पत्थर समझ कर के उसे ठोकर…
तन भी तेरा, मन भी तेरा तेरी ही प्रभु ये काया है, क्या करना है…
कल जो बेटी थी आज वो माँ बन गयी कभी जो आपकी ऊँगली पकड़ कर…
वो माँ की गोद में बीता जमाना याद आता है, कभी हंसना, कभी रोना, बिलखना…
क्यों काफी नहीं था ये कहना की आबरू उसकी लुटी है, जो जिस्म पे लगी…