वो खफा क्या हुए | Wo Khafa Kya Hue
वो खफा क्या हुए हर सहारा गया… वो खफा क्या हुए हर सहारा गया। पहले…
वो खफा क्या हुए हर सहारा गया… वो खफा क्या हुए हर सहारा गया। पहले…
रूप तेरा देखकर नयनों में कुछ ऐसी मस्ती समा गई, देखते ही तुझको ये जां…
ग़ैरों को अब गले लगाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया। सबको मेरे ऐब गिनाओ, जाओ तुमको…
क्या कहेगी कभी मिलने भी अगर आएगी वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगी…
सपनों की नगरी अब श्मशान हो गई इंसानियत की पहचान भी अनजान हो गयी महँगाई…
केवल दो गीत लिखे मैंने इक गीत तुम्हारे मिलने का इक गीत तुम्हारे खोने का।…
सच की बात करे तो गुनहगार ठहरता है, झूठ यहाँ हर चेहरे का गहना-सा लगता…
किसी के वादों पे हो निसार, किसी का सच दबा दे बार-बार, किसी के हिस्से…
भूख से तड़पते बचपन पर, कैसा यह उपकार है? पत्थर की उन मूर्तों पर, क्यूँ…