अब वफ़ाओं की कसमें
क्या कहेगी कभी मिलने भी अगर आएगी वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगी…
क्या कहेगी कभी मिलने भी अगर आएगी वो अब वफ़ादारी की क़स्में तो नहीं खाएगी…
केवल दो गीत लिखे मैंने इक गीत तुम्हारे मिलने का इक गीत तुम्हारे खोने का।…
क्या नाम दूं मैं उस रिश्ते को, जिस में थोड़ा सा प्रेम नहीं। बस मतलब…
आ गयी तब्दीलियाँ मंजिलों और रास्तों में मगर, आज भी चुपके से सीने में दिल…
दुखी मन की इस पीड़ा पर फिर से बरसने को , बस अब ये स्नेह…
छूता है वही लब जो हृदय के पास होता है, नजर से दूर वालों की तो…
मैं अपनी नजरों से लक्ष्य को भटकाऊ कैसे, वंहा मुझे तेरा चेहरा नजर आता है,…
निगाहों में जो लाए हो, मेरे दिल में यहां रख दोl नफरत हो मोहब्बत हो…
तू मेरी बंद डायरी में दफ़्न फटे पन्नों सा है, जिसमें जख्म मेरा पर निशा…
मुझे जान लोगे और पहचान लोगे तो समझूंगा के तुम हृदय थाम लोगे, यहाँ से…