Browsing: Social Issues

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सियासत का हाल

सच की बात करे तो गुनहगार ठहरता है, झूठ यहाँ हर चेहरे का गहना-सा लगता…

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गन्दी राजनीति

किसी के वादों पे हो निसार, किसी का सच दबा दे बार-बार, किसी के हिस्से…

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फागुन | Fagun

बाबा रस्ता देख रहे हैं कब आयेंगे लाल हमारे, बिन फागुन के बीत गए हैं…