ग़ैरों को अब गले लगाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।
सबको मेरे ऐब गिनाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।

कैसा हूँ? किस हाल में हूँ? क्यों पूछ रही हो अब मुझसे?
फिर से माथा मत ठनकाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।

किससे मिलने की ख़्वाहिश आँखों में भर कर आयी हो?
जाओ-जाओ, जल्दी जाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।

चाहा था कि नाम तुम्हारा साथ हमारे आएगा,
अब चाहे जिसकी कहलाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।

हम ही कितने पागल थे जो तुम पर ग़ज़लें कहते थे,
अब मत कहना शेर सुनाओ, जाओ तुमको छोड़ दिया।

रचना: राम पटेल, सोनभद्र