रूप तेरा देखकर नयनों में कुछ ऐसी मस्ती समा गई,
देखते ही तुझको ये जां दिल की बस्ती में समा गई।
प्यार के उस मोड़ पर जब तू मिली थी राह में,
तेरी वो मीठी मुस्कान रूह की हस्ती में समा गई।
दूरियों के दर्द में जब आसमां भी रो पड़ा,
पार करने को जिसे, वो प्यार की कश्ती में समा गई।
साज़-ए-दिल पर बज रहा है गीत कोई प्यार का,
ज़िंदगी की राह में वो शाम भी इस बस्ती में समा गई।
राम की इस शायरी में रंग है श्रृंगार का,
इश्क़ की ये दास्तान अब इस हस्ती में समा गई।
राम पटेल सोनभद्र ✍️
beautiful Hindi poem emotional love poem heart touching shayari Hindi kavita Hindi love poem Hindi shayari Indian poetry love and emotions love verses lyrical poetry poetic romance Ram Patel Sonbhadra romantic feelings romantic Hindi poem romantic poetry Romantic Shayari soulful poetry इश्क़ और श्रृंगार प्रेम कविता श्रृंगार रस कविता