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Poem mela-k-taiyari
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मेला के तयारी

आवा चला तोहके दरशन कराय देही। असो के नवमी क मेला घुमाय देही।। मौका निकाला…

Poem achcha-nhi-lgta
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अच्छा नही लगता…

मेरी सरलता तो स्वाभाविक है जनाब, मगर उनकी ये जटिलता, ये अच्छा नही लगता। पढ़…

Poem apni-beti
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अपनी बेटी…

न हँसती है न रोती है, वो बस चुपचाप लेटी है, दरिंदों ने जिसे लूटा…

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