शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएं
गुल्हड़ की माला,कुमकुम की थाली कर लो स्वागत आयी है मईया की सवारी अपने बच्चो…
गुल्हड़ की माला,कुमकुम की थाली कर लो स्वागत आयी है मईया की सवारी अपने बच्चो…
कल जो बेटी थी आज वो माँ बन गयी कभी जो आपकी ऊँगली पकड़ कर…
वो माँ की गोद में बीता जमाना याद आता है, कभी हंसना, कभी रोना, बिलखना…
क्यों काफी नहीं था ये कहना की आबरू उसकी लुटी है, जो जिस्म पे लगी…
ना मैं करूं गंगाजल अर्पण, ना पुष्प हार चढा़ऊ, ना धूप दीप नैवेद्य सजा कर…
मुझे जान लोगे और पहचान लोगे तो समझूंगा के तुम हृदय थाम लोगे, यहाँ से…
बदलते मौसम की तरह तुम भी बदल गए, तो क्या … अपने वादे से ही…
बता दो मुझे, ये नए मेहबूब का बाज़ार लगता कहाँ है जज्बातों से खरीदने की…
बस यादें रह जाती हैं दिल की सूनी सी गलियों में, जन्मों तक रिश्तों के…