फागुन | Fagun

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बाबा रस्ता देख रहे हैं कब आयेंगे लाल हमारे,
बिन फागुन के बीत गए हैं जाने कितने साल हमारे,,

फोन किया था तुमने बेटा, घर आओगे अबकी बार,
अम्मा तेरी खुश होकर के, लीप दिया था घर और द्वार,
पापड़ गुझिया और खुरमा से,भरे हुए थे थाल हमारे,
बिन फागुन के बीत गए हैं जाने कितने साल हमारे,,

अम्मा बोली हमसे बेटा, स्टेशन पर होकर आओ,
बेटा बहू और बच्चों को, जल्दी से घर लेकर आओ,
अंतिम गाड़ी गुजरी लेकिन फिर न आए लाल हमारे
बिन फागुन के बीत गए हैं जाने कितने साल हमारे,,

देहरी सूनी, सूना आंगन, सूना सब त्योहार है,
रंगों के इस महापर्व पर, बेरंगा परिवार है,
रंग गुलाल उड़ाती दुनिया,पर हैं सूने गाल हमारे,
बिन फागुन के बीत गए हैं जाने कितने साल हमारे…

~राम पटेल सोनभद्र ✍️

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