काशी में रंग लीला के संग
नवरंग में दुनिया सजी, नव रूप में हर शख्स है। मसानो में होली खेलता, बाबा…
नवरंग में दुनिया सजी, नव रूप में हर शख्स है। मसानो में होली खेलता, बाबा…
चलो रंगों से करके बात, रंगों को बुलाते हैं। खुशियों के हसीं रंगों में, मिलकर…
ये शब्दों की व्यथा देखो, जो न कह पाए तो क्या देखो। शब्दों की सी…
ये जीवन है बड़ा छोटा मगर लंबी कहानी है, कोई अपना समझ पाए तो बस…
क्या नाम दूं मैं उस रिश्ते को, जिस में थोड़ा सा प्रेम नहीं। बस मतलब…
सुनाई देती है तेरी आवाज़ मुझको धीरे धीरे क्यों, मैं जब भी,जहां जाता हूं.दिल में…
आ गयी तब्दीलियाँ मंजिलों और रास्तों में मगर, आज भी चुपके से सीने में दिल…
दुखी मन की इस पीड़ा पर फिर से बरसने को , बस अब ये स्नेह…
कुछ वक्त, कुछ लम्हे यूँ गुज़ारे भी थे। दर्द था, तन्हाई थी, तमन्नाओं के सहारे…