त्रिनेत्र धारी
गंगा के आवेग को तूने जटाओं में है संभाला विष भरे नागों की पहने है…
गंगा के आवेग को तूने जटाओं में है संभाला विष भरे नागों की पहने है…
जटाओं मे है तेरी मां गंगा मस्तक तेरा त्रिनेत्र धारी त्रिशूल से करता संघार तो…
आओ सुनाऊं मैं अपनी जुबानी, मेरे बचपन की कहानी, जितना सुनना हो सुने बाकी आपकी…
मैं अपनी नजरों से लक्ष्य को भटकाऊ कैसे, वंहा मुझे तेरा चेहरा नजर आता है,…
भाई ये कहानी है अजीब प्यार के अजीब दास्तान की हम हैं न….! ऐसे ही…
बेजुबान है वो फिर भी, देखते ही कितनी खुशी जता रहा है। सिर्फ दो बिस्किट…
बचकानी सी उन बातों में, बचपन की धुंधली यादों में, जो वक्त के दौड़ में…
नादान है इंसान ये समझ नहीं पाता है करता वो है मगर सब तु ही…
जिसके आगे शीश नवाता सारा संसार है गंगा किनारे बसता जिसका का धाम है कण…
वो मर्द हैं… दिल की बातों को वो जुंबा से कह नहीं पाएंगे, आखों में…